मनीष कुमार जोशी
पूरी दुनिया में धूम मचा रहा क्रिकेट का नया फार्मेट ट्वेंटी-20 जब सामने आया, तो न केवल इसे युवा कहा गया, बल्कि यह भी कहा गया कि यह केवल युवाओं का ही क्रिकेट है। ऐसा कहने वालो के अपने तर्क हो सकते हैं, लेकिन आईपीएल के पहले दो संस्करणो से साफ हो गया है कि अनुभव के बिना इसमें जीत नहीं हासिल की जा सकती। आईपीएल-1 में 38 की उम्र से ज्यादा के शेन वार्ने ने राजस्थान रॉयल्स को विजेता बनाया, तो आईपीएल-2 में गिलक्रिस्ट ने डेक्कन चार्जर्स को जिताया।
आईपीएल-2 में खिलाडि़यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो यह बात साफतौर पर सामने आती है कि हर टीम में बड़ी उम्र के खिलाडि़यों ने- जिनको प्रौढ़ मानकर ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई थी- शानदार प्रदर्शन कर टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई। रॉयल चैलेंजर्स के अनिल कुंबले व राहुल द्रविड़, डेक्कन चार्जेज के एडम गिलक्रिस्ट, चैन्नई सुपर किंग्स के मैथ्यु हेडन, राजस्थान रॉयल्स के शेन वार्ने, मुबई इंडियंस के सचिन का अपनी अपनी टीम की सफलता में अहम योगदान था। एडम गिलक्रिस्ट ने तो इस फार्मेट को भी युवा कहने से इनकार कर दिया। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि क्या वाकई यह क्रिकेट युवा नहीं है ?
टी-20 क्रिकेट को आलोचक ‘नैनो क्रिकेट’ कहते है, जहां सबकुछ पलक झपकते ही हो जाता है। ऐसे में खिलाड़ी में असीम उर्जा की आवश्यकता होती है। माना जाता है कि यह उर्जा एक युवा खिलाड़ी में ही उपलब्ध हो सकती है। इस क्रिकेट की तुलना फुटबाल और हॉकी जैसे तेज खेलो से की जाती है। लेकिन, मशहूर क्रिकेट लेखक पॉल बेवर इस बात से इनकार करते हैं कि यह केवल युवाओं का खेल है। वे उन लोगो की बात को पूरी तरह से खारिज करते हैं कि इस खेल को युवा ही खेल सकते हैं। उन्होने बहुत पहले ही कह दिया था कि इस फार्मेट में अनुभवी खिलाड़ी के बिना जीतना बेहद मुश्किल है। उनका मानना है कि बिना सोचे-समझे खेलना इस फार्मेट में भारी पड़ता है। इस फॉर्मेट में पल-पल अपनी रणनीति बदलनी पड़ती है। इस प्रकार रणनीति में बदलाव वही व्यक्ति कर सकता है, जिसे क्रिकेट की पूरी जानकारी और अनुभव हो। टेस्ट क्रिकेटर ही इस प्रकार की रणनीति बना सकता है और खेल में परिवर्तन कर सकता है। एक बिलकुल युवा खिलाड़ी से अपने खेल में हर पल परिवर्तन की अपेक्षा नहीं रख सकते है।
आईपीएल-2 में ऐसा कई बार देखा गया, जब टेस्ट क्रिकेटरो ने अपनी टीम को संकट से उबारा। सेमीफाइनल में राहुल द्रविड़ ने 44 रन की सुझबुझ भरी पारी खेल रॉयल चैलेंजर्स को मुश्किल मैच से निकाला। एडम गिलक्रिस्ट ने भी सेमीफाइनल में पहले 6 ओवर में आक्रमक शैली में बल्लेबाजी कर मैच अपनी टीम की झोली में डाल दिया। अनिल कुंबले ने पूरी प्रतियोगिता में विविधतापूर्ण गेंदबाजी की, जिससे अहम मौकों पर विपक्षी टीम के बल्लेबाज रन नहीं बना पाए। मुंबई इंडियंस टीम तो सचिन पर बहुत ज्यादा निर्भर रही।
यह एक ऐसा क्रिकेट है, जिसमें अनुभव की बहुत जरूरत होती है। इसमें ऐसे खिलाड़ी की जरूरत होती है, जो टेस्ट क्रिकेट भी खेल चुका हो। टेस्ट खिलाड़ी क्रिकेट के उतार-चढ़ावों से पूरी तरह वाकिफ होता है। ऐसे में टी-20 के फार्मेट में वह दबाव से निकलना जानता है। आईपीएल-2 के यदि सभी नतीजों को देखें तो अधिकांश जीते गए मैचो में 30 की उम्र से ज्यादा खिलाड़ियों का योगदान अहम था।
आईपीएल-2 की विजेता डेक्कन चार्जर्स के कप्तान एडम गिलक्रिस्ट का कहना है कि किसी खेल का कोई भी फॉर्मेट बना लें, उस खेल की आत्मा तो एक ही रहती है। ऐसे मे टी-20 भी अलग नहीं है। क्रिकेट की मूल बातों में कोई बदलाव नहीं है। गेंद और बल्ले के बीच संघर्ष सभी फॉर्मेट में एक जैसा है। ऐसे में टेस्ट क्रिकेटर टी-20 को और बेहतर ढंग से खेल सकता है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि टेस्ट क्रिकेट में किसी भी खिलाड़ी को सभी तरह का अनुभव मिलता है। ऐसे में टेस्ट क्रिकेटर के टी-20 में सफल होने की गुंजाईश ज्यादा होती है।
हालांकि, इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि टी-20 में युवाओ का कोई स्थान नहीं है। लेकिन, युवाओ के साथ अनुभव का होना बहुत जरूरी है। बिना अनुभव के इस फार्मेट में खिलाड़ी की सफलता संदिग्ध हो जाती है। आईपीएल-2 के नतीजों का विश्लेषण करने के बाद यह कहना बिल्कुल सही नहीं होगा कि ट्वेंटी क्रिकेट में खेलने के लिए युवा होना पहली शर्त है। हां, यह जरूर है कि क्रिकेट दूसरे स्वरूपों के मुकाबले इसमें फिटनेस का महत्व ज्यादा है।